भारत में जब भी वाहन खरीदने, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाने अथवा ट्रैफिक नियमों से जुड़ी किसी भी सरकारी प्रक्रिया की बातचीत होती है तो सबसे पहले जिस नाम को लिया जाता है वह है RTO। जी हां, हालांकि RTO का असली अर्थ रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस होता है। परंतु बहुत से लोग रोजमर्रा की जिंदगी में भी RTO शब्द का इस्तेमाल करते हैं। RTO शब्द का अर्थ परिवहन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। लेकिन बैंकिंग सेक्टर, सॉफ्टवेयर सेक्टर में भी RTO शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।
इस संदर्भ में RTO का फुल फॉर्म रिकवरी टर्नओवर ऑफिस या रिकवरी टाइम ऑब्जेक्टिव इत्यादि हो सकता है। परंतु आज हम Mp rto . com में’ जैसा RTO की बात कर रहे हैं वह है रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस जो की परिवहन व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
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RTO Full Form
RTO Full Form इसके काम और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। RTO का फुल फॉर्म रिजिनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस होता है और इसका काम भी रीजनल ट्रांसपोर्ट को संभालना होता है। RTO केवल वाहन विभाग तक सीमित नहीं होता बल्कि संपूर्ण सड़क परिवहन की रीढ़ होता है। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से लेकर वाहन की वैधता, टैक्स वसूली, रोड सेफ्टी, ट्रैफिक नियमों का पालन इत्यादि में RTO की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि आजकल RTO के कई सारे काम घर बैठे ऑनलाइन किए जा रहे हैं जिसकी वजह से अब लोगों को लंबी कतारो और एजेंट के झंझट से छुटकारा मिला है।
आइये सबसे पहले जानते हैं RTO का फुल फॉर्म
इसका अधिकार क्षेत्र और विभिन्न भाषाओं में RTO को क्या कहते हैं?
RTO का अर्थ होता है रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस जिसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भी कहा जाता है। यह रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अंतर्गत आता है। इसे सेंट्रलाइज्ड रूप से सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा नियंत्रित किया जाता है। हालांकि हर स्टेट में अलग-अलग RTO होते हैं जो राज्य के परिवहन को मैनेज करते हैं और परिवहन मंत्रालय को रिपोर्ट करते हैं। विभिन्न भाषाओं में RTO का नाम
- RTO full form in Hindi :क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय
- RTO full form in Marathi: प्रादेशिक परिवहन कार्यालय
- RTO full form in English: Regional Transport Office
RTO में किए जाने वाले मुख्य काम
RTO में वाहन से जुड़े सारे काम किए जाते हैं।RTO में परिवहन व्यवस्था से जुड़ी सारी फॉर्मेलिटी पूरी की जाती है जैसे की ,ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, लर्निंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन करना, वाहन ट्रांसफर, एड्रेस चेंज की प्रक्रिया पूरी करना ,रोड टैक्स वसूलना, कमर्शियल गाड़ियों का परमिट जारी करना ,ट्रैफिक नियमों का पालन न करने पर चालान जारी करना, PUC से जुड़े नियम, वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, दुर्घटनाओं के दौरान रखरखाव, SOS सर्विसेज प्रदान करना इत्यादि।
RTO में घर बैठे होने वाले का ऑनलाइन सर्विसेज
आरटीओ ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन
- ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल
- RC रजिस्ट्रेशन
- RC डाउनलोड
- एड्रेस चेंज
- डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस और RC
- ड्राइविंग लाइसेंस स्लॉट बुकिंग
- एप्लीकेशन स्टेटस चेक
RTO में विभिन्न विभाग और उनके कार्य का विवरण
जब भी कभी आप RTO ऑफिस जाते हैं तो वहां अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग विभाग बनाए गए होते हैं। काउंटर पर अलग-अलग काम किए जाते हैं। जैसे के ड्राइविंग लाइसेंस ट्रैफिक व्यवस्था इत्यादि को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके हर विभाग की अपनी जिम्मेदारी होती है।
लाइसेंस विभाग
RTO का यह विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है। यहाँ आप लर्नर लाइसेंस, परमानेंट लाइसेंस इत्यादि बनवा सकते हैं। RTO ऑफिस में ड्राइविंग लाइसेंस का काउंटर अलग होता है। जहां ड्राइविंग लाइसेंस हेतु आवेदन स्वीकार किये जाते हैं। ड्राइविंग टेस्ट आयोजित किया जाता है। यदि आपका ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है तो उसे रिन्यू किया जाता है। ड्राइविंग लाइसेंस खो चुका है तो डुप्लीकेट जारी किया जाता है। इसके अलावा यदि आपको अपने ड्राइविंग लाइसेंस में कुछ बदलाव करने हैं तो यह काम भी आप इसी विभाग में कर सकते हैं।
वाहन पंजीकरण विभाग
इस विभाग में RTO वाहन के पंजीकरण संबंधित सारे काम करता है। यहां वाहन से जुड़े सारे दस्तावेजों को संभाले जाता है और वाहन का पंजीकरण किया जाता है। इस विभाग में कुछ मुख्य कार्य किए जाते हैं जैसे कि नए वाहन का रजिस्ट्रेशन, व्हीकल नंबर प्लेट जनरेट करना, ओनरशिप ट्रांसफर करना, हाइपोथैकेशन लोन एंट्री करना, RC बुक में संशोधन करना, डुप्लीकेट RC जारी करना अर्थात वाहन से जुड़े सारे पंजीकरण ल कार्य इसी विभाग में पूरे होते हैं।
परमिट विभाग
RTO में एक विशेष विभाग बनाया जाता है जो कमर्शियल व्हीकल से जुड़ा होता है। इस विभाग में कमर्शियल व्हीकल से जुड़े सारे कार्य पूरे किए जाते हैं। यह पर परमिट सभी माल ढोने वाली गाड़ियों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। अन्यथा उन पर कार्यवाही की जाती है। यहां होने वाले मुख्य कार्य जैसे कि बस ,टैक्सी, ऑटो, ट्रक इत्यादि का परमिट जारी करना, स्टेट परमिट, नेशनल परमिट जारी करना ,गुड्स करियर परमिट जारी करना ,कांट्रैक्ट कैरिज परमिट जारी करना ,परमिट का रिनुअल करना और परमिट का ट्रांसफर करना।
टैक्स विभाग
सभी स्टेट के RTO विभागों में विभिन्न टैक्स विभाग होते हैं। यह टेक्स विभाग RTO ऑफिस से होने वाले सारे राजस्व का हिसाब किताब रखते हैं। जैसे लोगों से इकट्ठा की गई चालान, फाइन, रोड टैक्स इत्यादि का सारा लेखा जोखा इन्हीं के पास होता है। इस विभाग में निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं, रोड टैक्स वसूली, लाइफ टाइम टैक्स ,कमर्शियल व्हीकल टैक्स ,पेनेल्टी और लेट फीस, टैक्स रिफंड इत्यादि। टैक्स भुगतान के बिना RC सक्रिय नहीं मानी जाती इसलिए यह विभाग लगातार सक्रिय होता है।
गाड़ी का फिटनेस और निरीक्षण विभाग
RTO ऑफिस में आपको गाड़ी का फिटनेस और निरीक्षण विभाग भी मिलेगा । यह विभाग वाहन की तकनीकी स्थिति की जांच करता है। यह जांच बताती है कि आपका वहां कितना फिट है। यही आपके वाहन से जुड़े फिटनेस सर्टिफिकेट और PUC सर्टिफिकेट मिलते हैं। यहां किए जाने वाले मुख्य कार्य कमर्शियल व्हीकल का फिटनेस टेस्ट, व्हीकल इंस्पेक्शन, ओल्ड व्हीकल फिटनेस रिन्युअल, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल, रोड सर्टिफिकेट।
प्रवर्तन विभाग /एनफोर्समेंट
प्रत्येक RTO में प्रवर्तन विभाग नियमों के पालन को सुनिश्चित करता है। यह विभाग रोड नियमों का सख्ती से पालन करवाता है और न करने वालों पर उचित कार्यवाही की जाती है। इस विभाग द्वारा कुछ विशेष कार्य किए जाते हैं जैसे कि बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर कार्यवाही, ओवरलोडिंग की जांच ,परमिट उल्लंघन करने वालों पर चालान, इलीगल मोडिफिकेशन पर कार्रवाई, स्पेशल चेकिंग ड्राइव्स
कंप्यूटर / IT विभाग
जैसा कि हम सब जानते हैं वर्तमान में RTO द्वारा किए जाने वाले सारे काम अब ऑनलाइन हो चुके हैं। ऐसे में ऑनलाइन कार्यों को संचालित करने के लिए हर RTP विभाग में अब कंप्यूटर और आईटी विभाग बनाए गए हैं। यह ऑनलाइन किए जाने वाले सारे कार्य की देखभाल करते हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले कार्य जैसे कि ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग, परिवहन सारथी पोर्टल संचालन, स्मार्ट कार्ड और RC जारी करना, डाटा मैनेजमेंट ,ऑनलाइन स्टेटस अपडेट
जनसंपर्क और शिकायत विभाग
RTO विभाग द्वारा लोगों की शिकायतों का समाधान करने के लिए जनसंपर्क और शिकायत विभाग भी संचालित किया जाता है। यह विभाग लोगों की शिकायतें और सुझाव इकट्ठा करता है और उस पर उचित कार्यवाही करता है। यहां किए जाने वाले मुख्य कार्य आम जनता की शिकायत दर्ज करना, डिले या एरर से जुड़े मामले का निपटान करना, ऑनलाइन ग्रीवेंस हैंडलिंग करना ,RTI से जुड़े आवेदन स्वीकार करना, लोगों द्वारा दिए गए फीडबैक को सुरक्षित करना और उसके आधार पर काम करना।
प्रशासनिक विभाग
RTO के अंदरूनी कामकाज को संभालने के लिए प्रशासनिक विभाग संचालित किया जाता है। यह RTO के सभी विभागों के कामकाज को देखता है। RTO के सारे विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रबंधन इत्यादि का काम यह एडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्मेंट करता है। यहां किए जाने वाले मुख्य कार्य RTO में कर्मचारियों की नियुक्ति, कार्यालय प्रबंधन,रिकॉर्ड और फाइल मैनेजमेंट विभागीय रिपोर्ट सरकारी निर्देशों का पालन
रोड सेफ्टी सेल
हर राज्य में RTO विभाग के अलग-अलग रोड सेफ्टी सेल होते हैं। यह रोड सेफ्टी सेल सड़कों की सेफ्टी सुनिश्चित करते हैं। सड़कों पर चलने वाले वाहनों को नियमों का पालन करवाना, दुर्घटनाओं को टालना, हेलमेट सीट बेल्ट ना पहनने वालों की निगरानी करना इत्यादि काम यह करते हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले मुख्य कार्य रोड सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम चलाना, एक्सीडेंट एनालिसिस करना, सेफ्टी कैंपेन चलाना ,हेलमेट और सीट बेल्ट को पहनने के लिए लोगों को समझाना, स्कूल और पब्लिक अवेयरनेस ड्राइव शुरू करना।
RTO में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया
- यदि आप RTO से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों ही प्रकार से ड्राइविंग लाइसेंस बनवा सकते हैं। ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए आपको सारथी पोर्टल पर जाना होगा ।
- अप्लाई फॉर लर्नर लाइसेंस के विकल्प पर क्लिक करना होगा ।
- यहां आवेदन फॉर्म भरकर आपको लर्निंग लाइसेंस का एक छोटा सा टेस्ट देना होगा।
- इसके बाद लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया जाता है।
- लर्निंग लाइसेंस जारी होने के 30 दिनों के बाद और 6 महीने के भीतर आप परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं जिसके लिए आपको पुनः एक फॉर्म भरना होगा।
- लर्निंग लाइसेंस से जुड़े सारे दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
- ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के लिए स्लॉट बुक करना होगा।
- इसके बाद तय समय और तिथि पर जाकर टेस्ट देना होगा और टेस्ट पास होने पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
नया वाहन खरीदने के बाद RTO रजिस्ट्रेशन
- यदि आपने नई कार या बाइक खरीदी है और अब आप उसका रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं तो इसके लिए भी RTO रजिस्ट्रेशन जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले आपको डीलर से इंश्योरेंस और इनवॉइस प्राप्त करना होगा।
- फॉर्म 20, 21 और 22 भर कर जमा करना होगा।
- इसके बाद पहचान और पते का प्रमाण देना होगा।
- अब रोड टैक्स का भुगतान करना होगा।
- इसके बाद व्हीकल इंस्पेक्शन किया जाएगा ।
- व्हीकल इंस्पेक्शन होने के बाद कुछ दिनों में RC जारी हो जाता है।
Conclusion of RTO Full Form
कुल मिलाकर RTO यानी रीजनल ट्रांसफर ऑफिस भारत की सड़क परिवहन व्यवस्था की रीढ़ है। वाहन चलाने से पहले ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, या नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाना हो, परमिट लेना हो या टैक्स भरना हो या गाड़ी से जुड़ा कोई भी काम हो। सारे काम के लिए RTO की भूमिका अनिवार्य है। डिजिटल दुनिया मे RTO केवल दफ्तर नहीं रह गया है बल्कि एक टेक्नोलॉजी ड्रिवन सिस्टम बन चुका है।
यदि आप भी परिवहन और सारथी पोर्टल की मदद से RTO की सेवाओं का लाभ लेना चाहते हैं तो यह सब कुछ अब काफी आसान हो चुका है। हालांकि आज भी हर राज्य के सभी शहरों में अलग-अलग ज़ोन में RTO ऑफिस मौजूद है। परंतु इनका काम अब काफी आसान और कुछ व्यवस्थित हो चुका है। कुल मिलाकर सही जानकारी और सही प्रक्रिया अपनाकर आप RTO से जुड़ा हर काम आसानी से पूरा कर सकते हैं।
FAQs of RTO Full Form
RTO का फुल फॉर्म क्या है?
RTO Full Form यानि रिजिनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस होता है। हिंदी में इसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय कहा जाता है।
RTO Full Form In English क्या है?
आरटीओ फुल फॉर्म इन इंग्लिश रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस है। यही नाम आधिकारिक तौर पर सरकारी दस्तावेजों में इस्तेमाल होता है।
RTO Full Form In vehicle मतलब क्या है?
व्हीकल से जुड़े सारे कार्य आरटीओ में होते हैं। यहां पर ही वाहन रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट, RTO टैक्स जैसे काम किए जाते हैं इसलिए इसे रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस कहा जाता है।
RTO Full Form In Banking और RTO Full Form In Business क्या होता है?
बैंकिंग और बिजनेस सेक्टर में RTO Full Form रिकवरी टाइम ऑब्जेक्टिव होता है। वही कोरियर या डिलीवरी में RTO का फुल फॉर्म रिटर्न टू ओरिजिन होता है। हालांकि इस टर्म का रोड ट्रांसपोर्ट ऑफिस से कोई लेना देना नहीं होता।



